मधुकर जी के बारे में मैंने अपने पिछले पोस्ट में चर्चा की थी, और आखीर में हमें उन तक सहायता पहुचने का रास्ता मिल गया है । अब इस संकट की घडी में हम-सब से जो थोड़ा-बहुत बन पड़ता है उनका सहयोग करें ।
मधुकर सिंह जी अब भी आरा(धरहरा) में अपने गाँव पर हिन् हैं । अपने घर में आय का एक मात्र स्रोत मधुकर जी हिन् हैं । और आप तो जानते हैं हिन्दी साहित्य से कितना आय होता है , आइए इस मुश्किल की घड़ी में सब उनका साथ दें । आप अपनी सहायता सीधा मधुकर जी के बैंक अकाउंट में भेज सकते हैं ।
Bank account detail
Madhukar Singh
A/C No : 10151372336
State Bank of India
Fraser Road branch, Patna
Bank code : 3476
Core banking facility is available.
आशा है पहले की तरह हमारे मित्र इस बार भी आगे आयेंगे और मधुकर जी की यथासंभव मदद करेंगे । अगर आप मधुकर जी के द्वारा लिखी हुई कहानियाँ और उपन्यास पढना चाहते हैं तो यहाँ देखें
और अगर आप उनके द्वारा लिखी हुई पुस्तक पढना चाहते हैं तो आप यहाँ से ऑनलाइन खरीद सकते हैं ।
आप अगर सहायता राशी भेज रहे हैं तो एक मेल मुझे जरुर कर दें । मेरा पता है
anand_guneshwar[at]yahoo[dot]co[dot]in
please replace [at] by @ and [dot] by .
Showing posts with label मधुकर सिंह. Show all posts
Showing posts with label मधुकर सिंह. Show all posts
Tuesday, July 29, 2008
Thursday, July 24, 2008
कहानीकार मधुकर सिंह जी को करें थोडी मदद
अभी-अभी चिठ्ठाजगत के धडाधड टिपण्णी वाले पोस्टों को देख रहा था , तभी अचानक से मेरी नजर मोहल्ला के एक पोस्ट पर गई अब आप ही बताइए? कर्मेंदु ठीक हैं कि मंगलेश? " वहां जा कर देखा तो लोग तो बस घमासान मचा रखे हैं, जिसको जो मन में आ रहा है वो पोस्ट कर रहा है । मैं सब टिप्पणियों को पढ़ रहा था की मेरी नजर गई हमारे युवा कथाकार हरे प्रकाश उपाध्याय की टिपण्णी पर , आप भी पढ़े उनकी टिपण्णी, फ़िर हम उस पर करेंगे चर्चा :
पर इस घमासान में एक आदमी की नजर भी शायद इस पोस्ट पर नही गई या फ़िर उस गरमा-गरम बहस को छोड़ कर वो एक जरूरतमंद की मदद को क्यों आगे आए ? वाह रे दुनिया , और हमर हिन्दी लेखक समुदाय ने तो उस से भी बड़ा कमल कर दिया हस्ताक्षर का अभियान चलाकर ।
लेकिन हम जल्द हिन् मधुकर जी से बात करके उन तक सहायता पहुचने का कुछ बंदोबस्त करेंगे । और मुझे पुरा विश्वास है की हमारे मित्रगन इस कार्य में जरुर शरीक होंगे । और वो गरमा-गरम बहस हम उन्हीं लोगों के छोड़ देते हैं ।
कल तक मैं जरुर आपको मधुकर जी के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध करवाऊंगा ...
अधिकांश लोगों के लिए शायद यह महज एक सूचना होगी, लेकिन शायद ब्लॉग की दुनिया में कुछ लोग ऐसे हों, जिन्हें यह समाचार दुखी कर देगा। कथाकार मधुकर सिंह पिछले लगभग डेढ महीने से पक्षघात के पीडित है। इससे भी अधिक त्रासद यह है कि उनके इलाज की मुकम्मल व्यवस्था नहीं हो पा रही। आर्थिक कारणों से न तो उनकी फिजियोथेरेपी हो पा रही है, न ही पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हो रहीं हैं। वह पटना छोड कर आरा में रोग शैयया पर पडे हैं।
प्रभात खबर समेत पटना के अन्य अखबारों में भी इससे संबंधित सूचना प्रकाशित हो चुकी है। लेकिन न तो सरकार की ओर से कोई मदद मिली है न ही लेखक बिरादरी ने अपनी ओर से कोई कोशिश की हैं। इस संबंध में मैंने कुछ राजनेताओं से बात करने की कोशिश की तो उनका रिस्पांस तो बेहद ठंडा था । हां, कुछ लेखकों ने जरूर इस आशय का परिपत्र तैयार कर देने पर उस अपने 'हस्ताक्षर' कर देने की सहमति देने की दरियादिली दिखायी है। हिंदी लेखकों की इस महान संवेदनशीलता पर कुछ न कहना ही उचित होगा।
बहरहाल, इस पोस्ट का आशय इतना भर है कि........ शायद इसका कोई आशय नहीं है !
क़पया इस पोस्ट पर अपनी टिप्पणी न दें, यह लेखकों के हस्ताक्षर जैसी ही दरियादिली होगी।
मधुकर जी का मोबाइल नं है 9973608542, 9334821919
पर इस घमासान में एक आदमी की नजर भी शायद इस पोस्ट पर नही गई या फ़िर उस गरमा-गरम बहस को छोड़ कर वो एक जरूरतमंद की मदद को क्यों आगे आए ? वाह रे दुनिया , और हमर हिन्दी लेखक समुदाय ने तो उस से भी बड़ा कमल कर दिया हस्ताक्षर का अभियान चलाकर ।
लेकिन हम जल्द हिन् मधुकर जी से बात करके उन तक सहायता पहुचने का कुछ बंदोबस्त करेंगे । और मुझे पुरा विश्वास है की हमारे मित्रगन इस कार्य में जरुर शरीक होंगे । और वो गरमा-गरम बहस हम उन्हीं लोगों के छोड़ देते हैं ।
कल तक मैं जरुर आपको मधुकर जी के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध करवाऊंगा ...
आयी करें मदद एक और सूरज की ...
Subscribe to:
Posts (Atom)


